कबीर साहेब चारों युगों में प्रकट होते है
गौरी शंकर और सरस्वती नाम के ब्राह्मण दंपति थे। ये भगवान शिव के पुजारी थे। भगवान शिव की महिमा शिव पुराण से निःस्वार्थ भाव से भक्तात्माओं को कथा सुनाया करते थे। किसी से पैसा नहीं लेते थे। इतने नेक आत्मा थे कि यदि कोई उनको अपने आप दक्षिणा दे जाता था, उसमें से अपने भोजन के लिए रख लेते थे और जो बच जाता था उसका भण्डारा कर देते थे। अन्य स्वार्थी ब्राह्मण गौरी शंकर तथा सरस्वती से इर्ष्या रखते थे क्योंकि गौरी शंकर निस्वार्थ कथा किया करते थे। पैसे के लालच में भक्तों को गुमराह नहीं करते थे, जिस कारण से प्रशंसा के पात्रा बने हुए थे। उधर से मुस्लमानों को ज्ञान हो गया कि इनके साथ कोई हिन्दू, ब्राह्मण नहीं है। उन्होंने इसका लाभ उठाया और बलपूर्वक उनको मुस्लमान बना दिया। मुस्लमानों ने अपना पानी उनके सारे घर में छिड़क दिया तथा उनके मुँह में भी डाल दिया, सारे कपड़ों पर छिड़क दिया। उससे हिन्दू ब्राह्मणों ने कहा कि अब ये मुस्लमान बन गए हैं। आज के बाद इनका हमारे से कोई भाई-चारा नहीं रहेगा। हिन्दुओं ने अपने समाज से निकाल दिया। रोजी रोटी की समस्या हुई तो इन्होंने जुलाहे का कार्य शुरू कर दिया क्योंकि इसमे...