Posts

Showing posts from June, 2020

आत्महत्या सही या गलत

Image
आत्म_हत्या_सही_या_गलत पहली बात तो यह कि आत्महत्या करना बहुत ही गलत  है। आत्मा की किसी भी रीति से हत्या नहीं की जा सकती। हत्या होती है शरीर की। इसे स्वघात कह सकते हैं। दूसरों की हत्या से ब्रह्म दोष लगता है लेकिन खुद की ही देह की हत्या करना बहुत बड़ा अपराध है। जिस देह ने आपको कितने भी वर्ष तक इस संसार में रहने की जगह दी। संसार को देखने, सुनने और समझने की शक्ति दी। जिस देह के माध्यम से आपने अपनी प्रत्येक इच्‍छाओं की पूर्ति की और सबसे महत्व पूर्ण बात ये कि इस मानव शरीर से हम भक्ति करके अपना मोक्ष कर सकते है। ईश्वर ने ये गुण सिर्फ मनुष्य के शरीर में ही दिया है जो अपने जन्म मरण के चक्र को मिटा सकता है।उस देह की हत्या करना बहुत बड़ा अपराध है। जरा सोचिए इस बारे में। आपका कोई सबसे खास, सगा या अपना कोई है तो वह है आपकी देह। वैदिक ग्रंथों में आत्मघाती दुष्ट मनुष्यों के बारे में कहा गया है:- असूर्या नाम ते लोका अन्धेन तमसावृता। तास्ते प्रेत्यानिभगच्छन्ति ये के चात्महनो जना:।। अर्थात: आत्मघाती मनुष्य मृत्यु के बाद अज्ञान और अंधकार से परिपूर्ण, सूर्य के प्रकाश से हीन, असूर्य नामक लोक...

परमेश्वर साकार है नर आकार है

Image
परमेश्वर ने छः दिन में सृृष्टी रची तथा सातवें दिन विश्राम किया, प्रभु ने पाँच दिन तक अन्य रचना की, फिर छटवें दिन ईश्वर ने कहा कि हम मनुष्य को अपना ही स्वरूप बनायेंगे। फिर परमेश्वर ने मनुष्य को अपना ही स्वरूप बनाया, नर-नारी करके उसकी सृृष्टी की। फिर ईश्वर ने मनुष्यों के खाने के लिए केवल फलदार वृृक्ष तथा बीजदार पौधे दिए। जो तुम्हारे भोजन के लिए हैं। छः दिन में पूरा कार्य करके परमेश्वर ऊपर तख्त पर जा विराजा अर्थात् विश्राम किया। ईश्वर ने प्रथम आदम बनाया फिर उसकी पसली निकाल कर नारी (हव्वा) बनाई तथा दोनों को एक वाटिका में छोड़कर तख्त पर जा बैठे। फिर पृृष्ठ नं.  8  पर लिखा है कि ईश्वर ने मनुष्य जाति के खाने के लिए फलदार पेड़ तथा बीजदार पौधे बनाए और वन प्राणियों के लिए घास व पौधे बनाए। भगवान ने मनुष्य को अपना प्रति रूप बनाया। इससे स्वसिद्ध है कि भगवान (अल्लाह) आकार में है और वह मनुष्य जैसा है। वह पूर्ण परमात्मा तो यहाँ तक रचना छः दिन में करके सातवेंं दिन अपने सत्यलोक में तख्त पर विराजमान हो गया। इसके बाद अव्यक्त प्रभु (काल/ज्योति निरंजन) की भूल-भुलईयाँ प्रारम्भ हो गई।  ...

नाम बिना काया सुनी

Image
नाम बिना सूना नगर, पड़या सकल में शोर।  लूट न लूटी बंदगी, हो गया हंसा भोर।।  अदली आरती अदल अजूनी, नाम बिना है काया सूनी। झूठी काया खाल लुहारा, इंगला पिंगला सुषमन द्वारा।। कृतघ्नी भूले नर लोई, जा घट निश्चय नाम न होई।  सो नर कीट पतंग भुजंगा, चौरासी में धर है अंगा।  यदि बीज नहीं बीजा तो आत्मा रूपी खेत की गुड़ाई अर्थात् तैयारी करना व्यर्थ हुआ। कहने का अभिप्राय यह है कि इनसे आपको ज्ञान होगा जो कि आवश्यक है। परंतु पूर्ण गुरू द्वारा नाम उपदेश लेना अर्थात् बीज बीजना भी अति आवश्यक है। नाम भी वही जपना होगा जो कि गुरु नानक साहेब ने जपा, गरीबदास साहेब ने जपा, धर्मदास साहेब आदि संतों ने जपा। इसके अतिरिक्त अन्य नामों से जीव की मुक्ति नहीं होगी। इसलिए आप सभी ने नाम उपदेश लेकर अपना भक्ति रूपी धन जोड़ना प्रारम्भ करना चाहिए और अन्य सभी को भी बताना चाहिए। जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी। चूंकि न जाने कब और किस समय इस शरीर का पूरा होने का समय आ जाए। गुरु नानक देव जी भी कहते हैं कि - ना जाने ये काल की कर डारै, किस विधि ढल जा पासा वे। जिन्हादे सिर ते मौत खुड़गदी, उन्हानूं केड़ा ह...

जयंती ओर प्रकट दिवस में अंतर

Image
कबीर साहेब का प्रकट दिवस होता है, जयंती नहीं! सन् 1398 (विक्रमी संवत् 1455) ज्येष्ठ मास शुद्धि पूर्णमासी को ब्रह्ममूहूर्त में अपने सत्यलोक से सशरीर आकर परमेश्वर कबीर बालक रूप बनाकर लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर विराजमान हुए। पूर्ण परमात्मा का माँ के गर्भ से जन्म नहीं होता।कबीर साहेब का जन्म नहीं होता!आदरणीय गरीब दास जी ने भी अपनी वाणी के माध्यम से यह बताया है कि परमात्मा कबीर जी की कोई माता नही थी अर्थात उनका जन्म माँ के गर्भ से नही हुआ।गरीब, अनंत कोटि ब्रह्मांड में, बंदीछोड़ कहाय। सो तो एक कबीर हैं, जननी जन्या न माय।। परमात्मा सशरीर सतलोक से आते हैं, उनका जन्म नहीं होता।जो देव जन्म मृत्यु के चक्कर में है उनकी जयंती मनाई जाती है लेकिन पूर्ण परमात्मा कबीर जी का प्रकट दिवस मनाया जाता है क्योंकि वो सत्यलोक से सशरीर पृथ्वी पर प्रकट होते हैं ।गगगनमंडलसे उतरे सतगुरु पुरूष कबीर। जलज माही पौडन कियो सब पीरा का पीर ।ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।माता पिता मेरे कछु नाही, ना मेरे घर दासी।जुलहे का सुत आन कहाया, जगत करे मेरी हांसी।। ...

DeepKnowlegde_Of_GodKabir

Image
परम दिव्य ज्ञान परमेश्वर कबीर साहेब जी ने ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश के माता-पिता का ज्ञान कराया तथा उनकी उत्पत्ति बताई। कबीर साहिब ने ही सतलोक का ज्ञान दिया। 🌿परमात्मा कबीर साहेब जी ने ही हमे बताया है कि संसार में करोड़ों नाम (मंत्र) हैं उनसे मुक्ति नहीं होती, सारनाम से ही मुक्ति होती है लेकिन उस मंत्र को कोई नहीं जानता। उस मंत्र को सिर्फ तत्वदर्शी संत ही बता सकता है। कबीर, कोटि नाम संसार में, इनसे मुक्ति ना होय। सारनाम मुक्ति का दाता, वाको जाने न कोय।। 🌿कबीर साहेब जी ने कहा है कि मनुष्य जन्म बहुत अनमोल है इसे शास्त्र विरुद्ध साधना करके व्यर्थ नहीं करना चाहिए, क्योंकि मनुष्य जन्म बार बार नहीं मिलता। मानुष जन्म दुर्लभ है, ये मिले ना बारंबार। जैसे तरवर से पत्ता टूट गिरे, वो बहुर न लगता डार।।

कबीर परमात्मा के चमत्कार

Image
कबीर परमेश्वर जब नीरू नीमा को बालक रूप में मिले तब उससे पूर्व दोनों जने (पति-पत्नी) मिलकर कपड़ा बुनते थे। 25 दिन बच्चे की चिन्ता में कपड़ा बुनने का कोई कार्य न कर सके। जिस कारण से कुछ कर्ज नीरू को हो गया। फिर कबीर जी ने कहा कि आप चिंतित न हों, आपको प्रतिदिन एक सोने की मोहर (दस ग्राम स्वर्ण) पालने के बिछौने के नीचे मिलेगी। आप अपना कर्ज उतार कर अपना तथा गऊ का खर्च निकाल कर शेष बचे धन को धर्म कर्म में लगाना। उस दिन के पश्चात् दस ग्राम स्वर्ण प्रतिदिन नीरू के घर परमेश्वर कबीर जी की कृपा से मिलने लगा। कबीर साहेब द्वारा सर्वानंद को शरण में लेना पंडित सर्वानंद ने अपनी माँ से कहा कि मैंने सभी ऋषियों को शास्त्रार्थ में हरा दिया है तो मेरा नाम सर्वाजीत रख दो लेकिन उनकी माँ ने सर्वानंद से कहा कि पहले आप कबीर साहेब को शास्त्रार्थ में हरा दो तब आपका नाम सर्वाजीत रख दिया जाएगा। जब सर्वानंद कबीर साहेब के पास शास्त्रार्थ करने पहुँचे तो कबीर साहेब ने कहा कि आप तो वेद-शास्त्रों के ज्ञाता हैं मैं आपसे शास्त्रार्थ नहीं कर सकता। तब सर्वानंद ने एक पत्र लिखा कि शास्त्रार्थ में सर्वानंद जीते और...