नाम बिना काया सुनी


नाम बिना सूना नगर, पड़या सकल में शोर। 
लूट न लूटी बंदगी, हो गया हंसा भोर।। 
अदली आरती अदल अजूनी, नाम बिना है काया सूनी। झूठी काया खाल लुहारा, इंगला पिंगला सुषमन द्वारा।। कृतघ्नी भूले नर लोई, जा घट निश्चय नाम न होई। 
सो नर कीट पतंग भुजंगा, चौरासी में धर है अंगा। 

यदि बीज नहीं बीजा तो आत्मा रूपी खेत की गुड़ाई अर्थात् तैयारी करना व्यर्थ हुआ। कहने का अभिप्राय यह है कि इनसे आपको ज्ञान होगा जो कि आवश्यक है। परंतु पूर्ण गुरू द्वारा नाम उपदेश लेना अर्थात् बीज बीजना भी अति आवश्यक है। नाम भी वही जपना होगा जो कि गुरु नानक साहेब ने जपा, गरीबदास साहेब ने जपा, धर्मदास साहेब आदि संतों ने जपा। इसके अतिरिक्त अन्य नामों से जीव की मुक्ति नहीं होगी। इसलिए आप सभी ने नाम उपदेश लेकर अपना भक्ति रूपी धन जोड़ना प्रारम्भ करना चाहिए और अन्य सभी को भी बताना चाहिए। जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी। चूंकि न जाने कब और किस समय इस शरीर का पूरा होने का समय आ जाए। गुरु नानक देव जी भी कहते हैं कि - ना जाने ये काल की कर डारै, किस विधि ढल जा पासा वे। जिन्हादे सिर ते मौत खुड़गदी, उन्हानूं केड़ा हांसा वे।। कबीर साहेब कहते हैं कि - कबीर, स्वांस-स्वांस में नाम जपो, व्यर्था स्वांस मत खोए। न जाने इस स्वांस का, आवन हो के ना होए।। सतगुरू सोई जो सारनाम दृढ़ावै, और गुरू कोई काम न आवै। ‘‘सार नाम बिन पुरुष (भगवान) द्रोही‘‘ अर्थात् जो गुरू सारनाम व सारशब्द नहीं देता है या उसको अपने गुरू द्वारा नाम देने का अधिकार (आज्ञा) नहीं है अर्थात् शास्त्रों के अध्ययन से यदि कोई मनमुखी गुरु ये नाम भी दे देता हो तो भी वह गुरु और उनके शिष्यों को नरक में डाला जाएगा। वह गुरु भगवान का दुश्मन है, विद्रोही है। उसे भगवान के दरबार में उल्टा लटकाया जाएगा।

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