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Drug free india

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 शराब मानव जीवन बर्बाद करता है। इस बारे में परमात्मा कबीर साहेब जी कहते हैं- drugs effects भांग तम्बाकू छोरा, आफू और शराब गरीबदास कौन करेगा बंदगी, ये तो करें खराब शराब भक्ति का नाश करती है। इसे त्यागने में ही भलाई है। drug addiction परमात्मा कबीर साहेब जी अपनी अमर वाणी में कहते हैं मदिरा (शराब) पीवे कड़वा पानी, सत्तर जन्म कुत्ते का होना ।। शराब पीने से 70 जन्म तक कुत्ते बनने की सजा मिलेगी। ये खुद परमात्मा ने बताया है। आज ही इस तरह की वस्तुओं को त्यागना है। drug addiction नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान बनाता है फिर शरीर का नाश दिल है। शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग हैं फेफड़े, लीवर, रीढ़, हृदय। शराब सबसे पहले इन चारों भागों को खराब करती है। ये सब से निजात पाने के लिए संत रामपाल जी महाराज के सत्संग ज़रूर सुनते हैं।

संत रामपाल जी महाराज की संघर्ष यात्रा

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संत रामपाल दास  ( अंग्रेजी  : Sant Rampal Das ) एक भारतीय  आध्यात्मिक   कबीर पंथी  गुरु हैं तथा कबीर को भगवान (परमात्मा) बताते हैं। यह  सतलोक आश्रम  का संस्थापक भी हैं जो कि भारतीय राज्य  हरियाणा  के  हिसार  क्षेत्र में स्थित है। वर्तमान में हत्या व देशद्रोह के मुकदमे के कारण जेल में हैं। संत रामपाल दास Sant Rampal Das जन्म रामपाल सिंह जतिन 8 सितम्बर 1951  (आयु 68) धनाना ,  पंजाब  (अभी  हरियाणा ), भारत में राष्ट्रीयता भारतीय अन्य नाम बाबा रामपाल ,रामपाल दास व्यवसाय कबीर पंथ  समुदाय के संस्थापक प्रसिद्धि कारण Founder of सतलोक आश्रम वेबसाइट www .jagatgururampalji .org विवाद सन् २००६ में संत रामपाल ने सार्वजनिक तौर पर  सत्यार्थ प्रकाश  के कुछ भागों पर आपत्ति जताई थी। [1]  इससे गुस्साए  आर्य समाज  के हजारो समर्थको ने १२ जुलाई२००६ को करौथा के सतलोक आश्रम का घेराव कर लिया व हमला किया। [2]  बचाव में सतलोक आश्रम के अनुयायियों ने भी पलटवार किया। इस झड़प में सोनू नामक एक आर्य सम...

नवरात्रि पूजा

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नवरात्रि हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व है। नवरात्रि शब्द एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है 'नौ रातें'। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान, शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्रि वर्ष में चार बार आता है। पौष, चैत्र, आषाढ,अश्विन मास में प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है। नवरात्रि के नौ रातों में तीन देवियों - महालक्ष्मी, महासरस्वती या सरस्वती और दुर्गा के नौ स्वरुपों की पूजा होती है जिनके नाम और स्थान क्रमशः इस प्रकार है नंदा देवी(विंध्यवासिनी), रक्तदंतिका,शाकम्भरी(सहारनपुर), दुर्गा,भीमा(पिंजौर) और भ्रामरी(भ्रमराम्बा) नवदुर्गा कहते हैं। नवरात्रि एक महत्वपूर्ण प्रमुख त्योहार है जिसे पूरे भारत में महान उत्साह के साथ मनाया जाता है। नौ देवियाँ है :- शैलपुत्री - इसका अर्थ- पहाड़ों की पुत्री होता है। ब्रह्मचारिणी - इसका अर्थ- ब्रह्मचारीणी। चंद्रघंटा - इसका अर्थ- चाँद की तरह चमकने वाली। कूष्माण्डा - इसका अर्थ- पूरा जगत उनके पैर में है। स्कंदमाता - इसका अर्थ- कार्तिक स्वामी की माता। कात्यायनी - इसका अर्थ- कात्यायन आश्रम में जन्मि। कालर...

आत्महत्या सही या गलत

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आत्म_हत्या_सही_या_गलत पहली बात तो यह कि आत्महत्या करना बहुत ही गलत  है। आत्मा की किसी भी रीति से हत्या नहीं की जा सकती। हत्या होती है शरीर की। इसे स्वघात कह सकते हैं। दूसरों की हत्या से ब्रह्म दोष लगता है लेकिन खुद की ही देह की हत्या करना बहुत बड़ा अपराध है। जिस देह ने आपको कितने भी वर्ष तक इस संसार में रहने की जगह दी। संसार को देखने, सुनने और समझने की शक्ति दी। जिस देह के माध्यम से आपने अपनी प्रत्येक इच्‍छाओं की पूर्ति की और सबसे महत्व पूर्ण बात ये कि इस मानव शरीर से हम भक्ति करके अपना मोक्ष कर सकते है। ईश्वर ने ये गुण सिर्फ मनुष्य के शरीर में ही दिया है जो अपने जन्म मरण के चक्र को मिटा सकता है।उस देह की हत्या करना बहुत बड़ा अपराध है। जरा सोचिए इस बारे में। आपका कोई सबसे खास, सगा या अपना कोई है तो वह है आपकी देह। वैदिक ग्रंथों में आत्मघाती दुष्ट मनुष्यों के बारे में कहा गया है:- असूर्या नाम ते लोका अन्धेन तमसावृता। तास्ते प्रेत्यानिभगच्छन्ति ये के चात्महनो जना:।। अर्थात: आत्मघाती मनुष्य मृत्यु के बाद अज्ञान और अंधकार से परिपूर्ण, सूर्य के प्रकाश से हीन, असूर्य नामक लोक...

परमेश्वर साकार है नर आकार है

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परमेश्वर ने छः दिन में सृृष्टी रची तथा सातवें दिन विश्राम किया, प्रभु ने पाँच दिन तक अन्य रचना की, फिर छटवें दिन ईश्वर ने कहा कि हम मनुष्य को अपना ही स्वरूप बनायेंगे। फिर परमेश्वर ने मनुष्य को अपना ही स्वरूप बनाया, नर-नारी करके उसकी सृृष्टी की। फिर ईश्वर ने मनुष्यों के खाने के लिए केवल फलदार वृृक्ष तथा बीजदार पौधे दिए। जो तुम्हारे भोजन के लिए हैं। छः दिन में पूरा कार्य करके परमेश्वर ऊपर तख्त पर जा विराजा अर्थात् विश्राम किया। ईश्वर ने प्रथम आदम बनाया फिर उसकी पसली निकाल कर नारी (हव्वा) बनाई तथा दोनों को एक वाटिका में छोड़कर तख्त पर जा बैठे। फिर पृृष्ठ नं.  8  पर लिखा है कि ईश्वर ने मनुष्य जाति के खाने के लिए फलदार पेड़ तथा बीजदार पौधे बनाए और वन प्राणियों के लिए घास व पौधे बनाए। भगवान ने मनुष्य को अपना प्रति रूप बनाया। इससे स्वसिद्ध है कि भगवान (अल्लाह) आकार में है और वह मनुष्य जैसा है। वह पूर्ण परमात्मा तो यहाँ तक रचना छः दिन में करके सातवेंं दिन अपने सत्यलोक में तख्त पर विराजमान हो गया। इसके बाद अव्यक्त प्रभु (काल/ज्योति निरंजन) की भूल-भुलईयाँ प्रारम्भ हो गई।  ...

नाम बिना काया सुनी

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नाम बिना सूना नगर, पड़या सकल में शोर।  लूट न लूटी बंदगी, हो गया हंसा भोर।।  अदली आरती अदल अजूनी, नाम बिना है काया सूनी। झूठी काया खाल लुहारा, इंगला पिंगला सुषमन द्वारा।। कृतघ्नी भूले नर लोई, जा घट निश्चय नाम न होई।  सो नर कीट पतंग भुजंगा, चौरासी में धर है अंगा।  यदि बीज नहीं बीजा तो आत्मा रूपी खेत की गुड़ाई अर्थात् तैयारी करना व्यर्थ हुआ। कहने का अभिप्राय यह है कि इनसे आपको ज्ञान होगा जो कि आवश्यक है। परंतु पूर्ण गुरू द्वारा नाम उपदेश लेना अर्थात् बीज बीजना भी अति आवश्यक है। नाम भी वही जपना होगा जो कि गुरु नानक साहेब ने जपा, गरीबदास साहेब ने जपा, धर्मदास साहेब आदि संतों ने जपा। इसके अतिरिक्त अन्य नामों से जीव की मुक्ति नहीं होगी। इसलिए आप सभी ने नाम उपदेश लेकर अपना भक्ति रूपी धन जोड़ना प्रारम्भ करना चाहिए और अन्य सभी को भी बताना चाहिए। जितना जल्दी हो सके उतना जल्दी। चूंकि न जाने कब और किस समय इस शरीर का पूरा होने का समय आ जाए। गुरु नानक देव जी भी कहते हैं कि - ना जाने ये काल की कर डारै, किस विधि ढल जा पासा वे। जिन्हादे सिर ते मौत खुड़गदी, उन्हानूं केड़ा ह...

जयंती ओर प्रकट दिवस में अंतर

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कबीर साहेब का प्रकट दिवस होता है, जयंती नहीं! सन् 1398 (विक्रमी संवत् 1455) ज्येष्ठ मास शुद्धि पूर्णमासी को ब्रह्ममूहूर्त में अपने सत्यलोक से सशरीर आकर परमेश्वर कबीर बालक रूप बनाकर लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर विराजमान हुए। पूर्ण परमात्मा का माँ के गर्भ से जन्म नहीं होता।कबीर साहेब का जन्म नहीं होता!आदरणीय गरीब दास जी ने भी अपनी वाणी के माध्यम से यह बताया है कि परमात्मा कबीर जी की कोई माता नही थी अर्थात उनका जन्म माँ के गर्भ से नही हुआ।गरीब, अनंत कोटि ब्रह्मांड में, बंदीछोड़ कहाय। सो तो एक कबीर हैं, जननी जन्या न माय।। परमात्मा सशरीर सतलोक से आते हैं, उनका जन्म नहीं होता।जो देव जन्म मृत्यु के चक्कर में है उनकी जयंती मनाई जाती है लेकिन पूर्ण परमात्मा कबीर जी का प्रकट दिवस मनाया जाता है क्योंकि वो सत्यलोक से सशरीर पृथ्वी पर प्रकट होते हैं ।गगगनमंडलसे उतरे सतगुरु पुरूष कबीर। जलज माही पौडन कियो सब पीरा का पीर ।ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया।काशी नगर जल कमल पर डेरा, तहाँ जुलाहे ने पाया।माता पिता मेरे कछु नाही, ना मेरे घर दासी।जुलहे का सुत आन कहाया, जगत करे मेरी हांसी।। ...