संत रामपाल दास ( अंग्रेजी : Sant Rampal Das ) एक भारतीय आध्यात्मिक कबीर पंथी गुरु हैं तथा कबीर को भगवान (परमात्मा) बताते हैं। यह सतलोक आश्रम का संस्थापक भी हैं जो कि भारतीय राज्य हरियाणा के हिसार क्षेत्र में स्थित है। वर्तमान में हत्या व देशद्रोह के मुकदमे के कारण जेल में हैं। संत रामपाल दास Sant Rampal Das जन्म रामपाल सिंह जतिन 8 सितम्बर 1951 (आयु 68) धनाना , पंजाब (अभी हरियाणा ), भारत में राष्ट्रीयता भारतीय अन्य नाम बाबा रामपाल ,रामपाल दास व्यवसाय कबीर पंथ समुदाय के संस्थापक प्रसिद्धि कारण Founder of सतलोक आश्रम वेबसाइट www .jagatgururampalji .org विवाद सन् २००६ में संत रामपाल ने सार्वजनिक तौर पर सत्यार्थ प्रकाश के कुछ भागों पर आपत्ति जताई थी। [1] इससे गुस्साए आर्य समाज के हजारो समर्थको ने १२ जुलाई२००६ को करौथा के सतलोक आश्रम का घेराव कर लिया व हमला किया। [2] बचाव में सतलोक आश्रम के अनुयायियों ने भी पलटवार किया। इस झड़प में सोनू नामक एक आर्य सम...
परमेश्वर ने छः दिन में सृृष्टी रची तथा सातवें दिन विश्राम किया, प्रभु ने पाँच दिन तक अन्य रचना की, फिर छटवें दिन ईश्वर ने कहा कि हम मनुष्य को अपना ही स्वरूप बनायेंगे। फिर परमेश्वर ने मनुष्य को अपना ही स्वरूप बनाया, नर-नारी करके उसकी सृृष्टी की। फिर ईश्वर ने मनुष्यों के खाने के लिए केवल फलदार वृृक्ष तथा बीजदार पौधे दिए। जो तुम्हारे भोजन के लिए हैं। छः दिन में पूरा कार्य करके परमेश्वर ऊपर तख्त पर जा विराजा अर्थात् विश्राम किया। ईश्वर ने प्रथम आदम बनाया फिर उसकी पसली निकाल कर नारी (हव्वा) बनाई तथा दोनों को एक वाटिका में छोड़कर तख्त पर जा बैठे। फिर पृृष्ठ नं. 8 पर लिखा है कि ईश्वर ने मनुष्य जाति के खाने के लिए फलदार पेड़ तथा बीजदार पौधे बनाए और वन प्राणियों के लिए घास व पौधे बनाए। भगवान ने मनुष्य को अपना प्रति रूप बनाया। इससे स्वसिद्ध है कि भगवान (अल्लाह) आकार में है और वह मनुष्य जैसा है। वह पूर्ण परमात्मा तो यहाँ तक रचना छः दिन में करके सातवेंं दिन अपने सत्यलोक में तख्त पर विराजमान हो गया। इसके बाद अव्यक्त प्रभु (काल/ज्योति निरंजन) की भूल-भुलईयाँ प्रारम्भ हो गई। ...
प्रकृति में बाढ़, सूखा, भूकम्प, सुनामी जैसी अचानक आपदा आती ही रहती हैं और इनके कारण जन और सम्पत्ति का बहुत नुकसान होता है। अतः यह बहुत महत्त्वपूर्ण है कि इन प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने और जहाँ सम्भव हो इन आपदाओं को कम से कम करने के उपाय और साधन खोजे जाएँ। कुछ हमारी कमी के द्वारा होने वाली आपदा भी विनाशकारी ओर प्राकृतिक की तरह उन्हीं के समान नुकसान होता है प्राकृतिक आपदाओं के साथ ही मानव निर्मित आपदाओं के भी कारण, प्रभाव, रोकथाम और प्रबन्धन के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे। पौधा रोपण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ओर कटाई पर नजर रखी जाए। जलग्रहण वाले जगह पर पेड़ो की कटाई एकदम नहीं होना चाहिये। पेड़ कटने से पानी बहुत अधिक तीव्रता से बहता है और पानी के साथ मिट्टी बहने से मृदा-अपरदन बहुत होता है। इससे नदियों में गाद जमने का मुख्य कारण है और नदियों में गाद जमने से बाढ़ों की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है। ऐसे निर्माण कार्य की जिसके कारण जल निकास बाधित हो, कभी अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। अचानक आये पानी के निकास की नालियों के ऊपर अतिक्रमण नहीं होना चाहिये। इन सबसे...
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